Saturday, February 20, 2010

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

---Ghalib

3 comments:

  1. मोहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का ;
    उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले|

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  3. निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिन,
    बहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले|

    ख़ुल्द - paradise

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