तेरे लिए ठहरा पानी आज बह ही निकला, कुछ सागर बिना शोर भी मचल जाते हैं l
दिन डूब के तो रोज़ ही बुझा करता है, कभी लहरें भी उजालोँ को पी जाती हैं l
आज की रात बहुत सी लहरों से रोशन होगी l
-गुलज़ार (त्रिवेणी)
The name says it all...
तेरे लिए ठहरा पानी आज बह ही निकला, कुछ सागर बिना शोर भी मचल जाते हैं l
दिन डूब के तो रोज़ ही बुझा करता है, कभी लहरें भी उजालोँ को पी जाती हैं l
आज की रात बहुत सी लहरों से रोशन होगी l
-गुलज़ार (त्रिवेणी)