Sunday, January 31, 2010

ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर
या वो जगह बता दे जहाँ पर खुदा न हो.


-- Mirza Ghalib

(Courtesy: Anurag Dak)

Saturday, January 30, 2010

कुछ दूर हमारे साथ चलो हम दिल की कहानी कह देंगे
समझे न जिसे तुम आँखों से वो बात ज़बानी कह देंगे

फूलों की तरह जब होंठों पर इक शोख तबस्सुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में इक बात पुरानी कह देंगे

इज़हार-ए-वफ़ा तुम क्या समझो इक़रार-ए-वफ़ा तुम क्या जानो
हम ज़िक्र करेंगे गैरों का और अपनी कहानी कह देंगे

मौसम तो बड़ा ही ज़ालिम है तूफ़ान उठाता रहता है
कुछ लोग मगर इस हलचल को बदमस्त जवानी कह देंगे




....sung by Hariharn from the album Abraar-e- ghazal

courtesy: Priyanka & Rohit Mishra


Wednesday, January 20, 2010

हमको मालूम है जन्नत की हकीक़त लेकिन
दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है ...


Courtesy: Rohit Mishra

Sunday, January 17, 2010

कभी रस्ते में मिल जाओ तो कतरा के गुज़र जाना
हमें इस तरह तकना जिस तरह पहचाना नहीं तुमने
हमारा ज़िक्र जब आये तो यूँ अनजान बन जाना
कि जैसे नाम सुन कर भी हमें जाना नहीं तुमने


---from the movie Kabhi Kabhi.
(Courtsey Rohit Mishra)

Saturday, January 16, 2010

भारी भरकम एक कहानी केले के छिलके पर फिसली,
एक कहानी हल्की फुलकी उड़ जाए जो फूंके तितली,
खट्टी हो तो नमक लगा के गले में रख के पानी ले लो ...
गुच्छा है भई गुच्छा है कहानियों का गुच्छा है....
कहानी ले लो.....


Gulzar, without any doubt is a gem of Indian Cinema. For decades now, he has given us songs
to cherish, to hum, to think over and appreciate the beauty of his words. It's difficult to imagine
that the same person can give us songs like मेरा कुछ सामान and on the other hand can write
चड्डी पहन के फूल खिला है . The same person can pen down words like
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी हैरान हूँ मैं and बीड़ी जलई ले with equal ease. The list is endless. In the world of song writers, he stands out as a poet....

a recent one from "पोटली बाबा की"....


दोनों तरफ से बजती है यह
आये हाय ज़िन्दगी क्या ढोलक है
horn बजा के आ बगियाँ में 
अरे थोडा आगे गति रोधक है
अरे चल चल चल उड़ जा उड़ जा फुर फुर्र…